एक साथ

 तुम्हें पता हैं आज कि हम हर पल है तुम्हारे साथ,

जब चाहो मुड़कर पकड़ सकते हो हमारा हाथ, 

तुम्हें पता है ये हाथ कहीं जाएगा नही,

बोला है इसने कि इसे सदा पाओगे यहीं ।


इस भरोसे को तुमसे सींचा भी जा सकता था,

हाथ थामकर अपने हाथ से खींचा भी जा सकता था,

नए - नए हाथ कल भी तुम्हारे लिए कम ना होंगे,

शायद मुड़कर देखोगे तो पाओगे उनमें हम ना होंगे ।


शायद याद करोगे कि ऐसा कैसे हो सकता है,

हमेशा जो मेरे लिए था वो कैसे खो सकता है,

शायद समझोगे हाथ छोड़ना कितना ना गवारा था,

याद करोगे वो साथ कितना अपना और प्यारा था ।






एक बार सोचना जरूर कि ऐसा क्यों हो गया,

हमेशा तुम्हारे साथ था तो वह कब खो गया,

अचानक से गायब तो नहीं ही हुआ होगा,

शायद अनचाहेपन से थककर बैठ गया होगा ।


वो इस इंतजार में बैठा होगा कि वह आएगा,

जब उसका मन होगा तो अपने पास बुलाएगा,

जब तुम्हें पता ही नहीं चला फर्क उसके ना होने का,

फिर कोई अर्थ नहीं था उसके और सहने का ।


प्रार्थना करते है की तुम्हे यह सब याद ना आए,

हमारे साथ की तलाश तुम्हे लौटा ना लाए,

हमेशा खुश रहोगे प्रतिदिन जैसे उत्सव होंगे,

बस उन मौसमों में शरीक हम ना होंगे,

कल भी आपकी परवाह करने वाले कम ना होंगे,

मगर अफसोस उन चाहने वालों में हम ना होंगे ।


अगर इतना याद आएगा तो कोशिश करोगे,

एक बार फिर से हाथ थामने को पलटोगे,

मिल जाएगा हाथ बस फिर कभी छोड़ना मत,

जो छोड़ना ही हो तो वापस पलटना मत ।

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