मेरा संबंध


मैंने तुम्हें जब जब देखा

एक कोमल फूल के जैसा देखा

मैंने कभी तुम्हें अपने लिए नहीं चाहा

फूल को तोड़ना मैं पाप समझता हुं 


मैंने तुम्हें जब जब पढ़ा

एक पवित्र ग्रंथ की तरह पढ़ा

तुम पर संपूर्ण विश्वास किया

इसे मैं अपना धर्म समझता हुं


मैंने तुम्हें जब जब सोचा

हमारा साथ हंसना याद आया

बांधकर रखे इन बीत चुके लम्हों से

मैं अपना जीवन अनमोल समझता हुं

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