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प्रेम की तहजीब

प्रेम की तहजीब (The etiquette of love) - SATYA, 17 Jan 2026. आज मैं आपसे प्रेम की उस भाषा में बात करना चाहता हूँ जो शोर नहीं करती, जो शिकायत नहीं करती, जो ठहराव, त्याग और ख़ामोशी में अपनी सबसे गहरी सच्चाई कह देती है। हिंदी शायरी में एक विधा है — ग़ज़ल। ग़ज़ल केवल प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं है, ग़ज़ल प्रेम को छोड़ देने की हिम्मत भी सिखाती है। यहाँ मोहब्बत का मतलब पाना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ दूर हो जाना भी होता है। यहाँ इश्क़ माँगता नहीं है, वह भारी दिल के साथ पीछे हट जाता है। आज मैं जिस ग़ज़ल की कुछ पंक्तियाँ आपके सामने रख रहा हूँ, यह प्रेम की सबसे ऊँची तमीज़ है।   तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा, अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा। यह शेर ‘प्रेम की पराकाष्ठा’ है। यहाँ आशिक़ कहता है— “अगर मेरी मौजूदगी तुम्हारे लिए बोझ बन रही है, तो मैं चुपचाप चला जाऊँगा। अपने आँसू भी तुम्हें नहीं दिखाऊँगा।” यह मोहब्बत का सबसे पवित्र रूप है— ऊँचे दर्जे की मोहब्बत जहाँ अपना दर्द भी दूसरे पर न थोपा जाए। अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा। यह शेर हमें ‘ठहराव’ का अर्...

Something

 I can't define it.  What is it? It's certainly not something routine.  It's either a starting or an end.  Thankful for whatever it is.

Waqt ki baatein

 Waqt ki yeh baatein hain, ese gujar jaane do.

प्रशांत

 रख दिया है कदम जब डगडगाती नाव में, कर लिया है प्रण जब भवसागर पार करने का ललकार दिया है जब प्रशांत को पतवार पकड़े कसकर फिर यह संकोच कैसा । तो अब राह में चक्रवात भी आएंगे तो अब सुनामी भी रास्ता बताने आएगी और यह नाव ऊँची लहरों में सिसक जाएगी हाँ है चप्पू तेरे हाथ में । हाँ तु ज्वार से रण ठानेगा, तु लहरों से उठ जाएगा, अपने प्रयासों को सींचते रहना, एक दिन एक दिन फिर ऐसा आएगा, तु किनारे को पहुंच जाएगा, तु लहरों को रौंद जाएगा, तु खड़ा होगा पतवार पकड़े जब आएगा प्रशांत खुद तेरे कदमों तले बिछ जाएगा हाँ तु ही प्रशांताधिराज कहलाएगा।

मेरा संबंध

मैंने तुम्हें जब जब देखा एक कोमल फूल के जैसा देखा मैंने कभी तुम्हें अपने लिए नहीं चाहा फूल को तोड़ना मैं पाप समझता हुं  मैंने तुम्हें जब जब पढ़ा एक पवित्र ग्रंथ की तरह पढ़ा तुम पर संपूर्ण विश्वास किया इसे मैं अपना धर्म समझता हुं मैंने तुम्हें जब जब सोचा हमारा साथ हंसना याद आया बांधकर रखे इन बीत चुके लम्हों से मैं अपना जीवन अनमोल समझता हुं
 Friendship is greatest fallacy.
 जब इंसान ही नहीं रहेगा तो शिकायतों का क्या करोगे ।