रख दिया है कदम जब डगडगाती नाव में, कर लिया है प्रण जब भवसागर पार करने का ललकार दिया है जब प्रशांत को पतवार पकड़े कसकर फिर यह संकोच कैसा । तो अब राह में चक्रवात भी आएंगे तो अब सुनामी भी रास्ता बताने आएगी और यह नाव ऊँची लहरों में सिसक जाएगी हाँ है चप्पू तेरे हाथ में । हाँ तु ज्वार से रण ठानेगा, तु लहरों से उठ जाएगा, अपने प्रयासों को सींचते रहना, एक दिन एक दिन फिर ऐसा आएगा, तु किनारे को पहुंच जाएगा, तु लहरों को रौंद जाएगा, तु खड़ा होगा पतवार पकड़े जब आएगा प्रशांत खुद तेरे कदमों तले बिछ जाएगा हाँ तु ही प्रशांताधिराज कहलाएगा।