सुखद अंत की कहानी
मैं एक पाठ लिखूँगा,
उसमें तेरे नाम लिखूंगा ।
प्यार भरा संसार लिखूँगा,
मेरी किस्मत बेकार लिखूँगा ।
किरदारों से सच बात लिखूँगा,
कहानी सब साफ साफ लिखूँगा ।
खुशनुमा शाम लिखूँगा,
उदासीन रात लिखूँगा ।
प्रेम गीत की मल्हार लिखूँगा,
उठी है जो चत्कार लिखूँगा ।
नदी के दो किनारे लिखूँगा,
सबसे प्यारे तारे लिखूँगा ।
एक हवा का झोंका लिखूँगा,
और पतझड़ का हाल लिखूँगा ।
बारिश में हरे खेत लिखूँगा,
जलमग्न बर्बादी विशेष लिखूँगा।
अनगिनत रंगों में जो लिखूँगा,
आख़िरी लेखन भी रंगीन लिखूँगा ।
पर नाम तेरा नहीं लिखूँगा,
हाल तब मेरा भी नहीं लिखूँगा।
सारी स्मृतियाँ जीवंत रहेंगी,
जीवन का मतलब शेष लिखूँगा ।।
Comments
Post a Comment