नया साल : Hindi poem By Satyanarayan Sharma
नया साल
:- SATYANARAYAN SHARMA (SACHIN)
आया है आज नया साल,
अब आते है मन में कई ख्याल,
क्या वाकई पूरे होंगे ये ख्याल ?
अब आता है मन में यह सवाल,
आया था एक पिछला साल,
तब भी आया था एक यह ख्याल,
पूरा नहीं हुआ बस रह गया मलाल,
क्या वाकई कभी न रुलाएगा ये साल ?
सोचता हूँ क्या हुआ जो नया है साल,
नया होने से थोड़े ही बदलते है हाल,
अरे आए और गए सालों साल कितने साल,
क्या हुआ मैं किसी का जैसा हूँ माँ का लाल ?
वीर मैं खुद ही जो बदलू अपने हाल,
खड़ा कुरुक्षेत्र में कसकर थामूं अपनी ढाल,
कर प्राण प्रतिज्ञा जो उठाऊं मैं भाल,
कहलाऊँ मैं ही प्रशांताधिराज, मैं ही विजयपाल,
स्वयं के कर्मों का ही फल होते हैं अपने हाल,
स्वयं के कन्धों पर ही होता है जीवन खुशहाल,
है नया साल भी मुतमइन क्या होगा वीर का कर्मजाल,
अनंत - अनंत शुभकामनाएँ, मुबारक हो आपको "नया साल"
😍😍👏🏻👏🏻 Mast !!
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